Saturday, May 19, 2012

साजन गए परदेस

 


साजन गए परदेस सखी री,
कैसे कर लूँ मैं सोला सिंगार।

गए परदेस मोरी सुधि हू न लीन्हीं,
ऐसो निठुर मेरो यार।

कौन सी सवतिया उनको मिल गई,
भूलि गए रे मेरो प्यार।

भोरहिं कागा उड़ि उड़ि जाओ,
बोलो सैयाँ को हमरी गोहार।

मोर सँदेसवा पिय तक लइ जइओ,
ओ पुरवैया की बयार।

ओरे बदरवा उन सन कहियो,
मोरे हियरा में बिथा अपार।

मोहें तोहे बिन नींद न आवे,
डरपै दुखिया जियरवा हमार।

लौट भी आओ, ऐसे न रूठो,
पइयाँ परूँ मैं सैयाँ तोहार।

---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---१९ मई २०१२