नारद जी पहुँचे विष्णु जी के द्वार
हरि ने उठ के किया सत्कार
नारद जी आइए
मृत्युलोक के हालात बताइए
नारद जी बोले
प्रभु अजब है पृथ्वी का हाल
मौत को मारने पर तुले हैं, आपके लाल
कैन्सर, हृदय रोग आदि घातक बीमारियाँ
मानव करना चाहता है इनका ख़ात्मा
मरने के साधन कम हो रहे हैं
बूढ़े लोग ख़ूब डट के बढ़ रहे हैं
मरते है किन्तु घुट घुट के मरते हैं
वात रोग यानी कि अर्थराइटिस जैसे रोग लगते हैं
आल्जहाइमर जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं
मरने और जीने का फर्क कम कर रही हैं
कम बूढ़े हैं जो वे बूढ़ों की सेवा करते हैं
जावानों का अनुपात घट रहा है
मानव अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है
प्रभु बोले, नारद सही फरमाया है
मानव ने प्रगति के नाम पर अपनी बरबादी को अपनाया है
सृष्टि को सही तरीके से चलाने के लिए
आवश्यक है सन्तुलन
मृत्यु नहीं है मानव की दुश्मन
जीवन और मृत्यु चलते हैं साथ साथ
कहते हैं इनका चोली दामन सा साथ
किन्तु आप नहीं घबराइए
एक आध शताब्दी तक प्रतीक्षा करिए
मानव तब समझेगा
और दिशा परिवर्तन करेगा
समझेगा कि बूढ़े लोगों का मरना ज़रूरी है
युवाओं की संख्या में बढ़ती ज़रूरी है
बूढ़ों में विश्व को चलाने की ऊर्जा नहीं है
परिश्रम करने की क्षमता नहीं है
इस लिए मौत को दुश्मन न मानिए
सृष्टि संचालन का यह साधन है मानिए
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---२१ मार्च २०१२