आपने कभी सोचा है
कि दुनिया में क्या हो रहा है
जैसे जैसे मशीनें पतली हो रही हैं
वैसे वैसे इन्सान मोटे हो रहे हैं
यंत्रों का साइज़ नैनो हो रहा है
आदमी का साइज़ मेगा हो रहा है
कमरे भर का कम्प्यूटर जो काम करता था
वही काम अब हथेली भर का लैपटाप करता है
पहले कम खाने और ज़्यादा काम से आदमी मर जाता था
अब कम काम और ज़्यादा खाने से आदमी मर जाता है
पहले का आदमी भूख से मर जाता था
आज का आदमी बदहज़मी से मर जाता है
पहले का परिश्रम जानलेवा हुआ करता था
आज का विश्राम जानलेवा होता है
कल का आदमी टी बी से मरता था
आज का आदमी दिल के दौरे से मरता है
कल की समस्या थी कि बहुत अधिक काम है
आज की समस्या है कि बहुत अधिक आराम है
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---१३ जुलाई २०१२
10 comments:
सही फ़रमाया , नया दॊर ऒर तन आसानियां
फिर भी दुख तकलीफ़ें इनसान का पीछा नहीं छोड़तीं
पहले कम खाने और ज़्यादा काम से आदमी मर जाता था
अब कम काम और ज़्यादा खाने से आदमी मर जाता है
ग़रीबे अहॆर तो फ़ाक़े से मर गया आरिफ़
अमीरे अहेर ने हीरे से ख़ुदकुशी करली
True that..... TV is a bigger killer than TB nowadays.
-Krishan Mago
How true
Very well said
Something for us to really think about:-)
Lakshmi Rao
Sahi baat hai!!!
कल आज और कल का वही चक्र
अच्छी लगी कविता ।
मुकेश कुमार तिवारी
कविता में आज की स्थिति और परिस्थिति का बिलकुल सही निरूपण किया गया है l
कुसुम वीर
Thank you. Amusing.
Brijen Gupta
An awesome comparison between "KAL" and "AAJ".
B. K. Gaur
Yeh Jindagi to ek dariya hai,
Apana rukh hamesha badalti hai.
Kisi ko to sahil yo hi mil jata hai,
Kisi ki nazar tarasti hi rahti hai.
एकदम सही..सटीक!!
Post a Comment