Friday, July 13, 2012

आपने कभी सोचा है



आपने कभी सोचा है
कि दुनिया में क्या हो रहा है

जैसे जैसे मशीनें पतली हो रही हैं
वैसे वैसे इन्सान मोटे हो रहे हैं

यंत्रों का साइज़ नैनो हो रहा है
आदमी का साइज़ मेगा हो रहा है

कमरे भर का कम्प्यूटर जो काम करता था
वही काम अब हथेली भर का लैपटाप करता है

पहले कम खाने और ज़्यादा काम से आदमी मर जाता था
अब कम काम और ज़्यादा खाने से आदमी मर जाता है

पहले का आदमी भूख से मर जाता था
आज का आदमी बदहज़मी से मर जाता है

पहले का परिश्रम जानलेवा हुआ करता था
आज का विश्राम जानलेवा होता है

कल का आदमी टी बी से मरता था
आज का आदमी दिल के दौरे से मरता है

कल की समस्या थी कि बहुत अधिक काम है
आज की समस्या है कि बहुत अधिक आराम है

---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---१३ जुलाई २०१२

10 comments:

Kalimullah said...

सही फ़रमाया , नया दॊर ऒर तन आसानियां
फिर भी दुख तकलीफ़ें इनसान का पीछा नहीं छोड़तीं
पहले कम खाने और ज़्यादा काम से आदमी मर जाता था
अब कम काम और ज़्यादा खाने से आदमी मर जाता है
ग़रीबे अहॆर तो फ़ाक़े से मर गया आरिफ़
अमीरे अहेर ने हीरे से ख़ुदकुशी करली

Unknown said...

True that..... TV is a bigger killer than TB nowadays.
-Krishan Mago

Lakshmi said...

How true
Very well said
Something for us to really think about:-)
Lakshmi Rao

Pradeep Srivastava said...

Sahi baat hai!!!

Anonymous said...

कल आज और कल का वही चक्र

अच्छी लगी कविता ।

मुकेश कुमार तिवारी

Anonymous said...

कविता में आज की स्थिति और परिस्थिति का बिलकुल सही निरूपण किया गया है l

कुसुम वीर

Anonymous said...

Thank you. Amusing.
Brijen Gupta

Anonymous said...

An awesome comparison between "KAL" and "AAJ".
B. K. Gaur

Anand Hi Anand said...

Yeh Jindagi to ek dariya hai,
Apana rukh hamesha badalti hai.
Kisi ko to sahil yo hi mil jata hai,
Kisi ki nazar tarasti hi rahti hai.

Udan Tashtari said...

एकदम सही..सटीक!!