देव लोक में मचा है हाहाकार
भारी संकट से सभी हैं लाचार
देवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक
यज्ञ और हवन और सर्वाधिक सोम रस
सोम रस का हो गया है पृथ्वी पर लोप
हवन सामग्री पर है मिलावट का प्रकोप
यज्ञ भी लोग अब कहाँ करते हैं
वे तो मूर्तियों पर धन लुटाते हैं
परेशान हैं इन्द्र, अग्नि और वरुण
अश्विनीकुमार, चन्द्र, सूर्य और अरुण
ब्रह्मा का भी कट चुका है पत्ता
उनकी भी पूजा करता कोई अलबत्ता
शिव और विष्णु और उनके अवतार
लक्ष्मी और पार्वती का लगता दरबार
कुमार और गणपति हैं शेष के भागी
उनकी भी है काफी जनता अनुरागी
गायत्री मंत्र से बनी है सूर्य देव की हस्ती
करवा चौथ से है चन्द्र देव की पुष्टि
शेष देव हो गए हैं यदि मृत नहीं तो मृतक समान
भगवान भी नहीं रख रहे हैं उनका ध्यान
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---३० अक्टूबर २०११
भारी संकट से सभी हैं लाचार
देवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक
यज्ञ और हवन और सर्वाधिक सोम रस
सोम रस का हो गया है पृथ्वी पर लोप
हवन सामग्री पर है मिलावट का प्रकोप
यज्ञ भी लोग अब कहाँ करते हैं
वे तो मूर्तियों पर धन लुटाते हैं
परेशान हैं इन्द्र, अग्नि और वरुण
अश्विनीकुमार, चन्द्र, सूर्य और अरुण
ब्रह्मा का भी कट चुका है पत्ता
उनकी भी पूजा करता कोई अलबत्ता
शिव और विष्णु और उनके अवतार
लक्ष्मी और पार्वती का लगता दरबार
कुमार और गणपति हैं शेष के भागी
उनकी भी है काफी जनता अनुरागी
गायत्री मंत्र से बनी है सूर्य देव की हस्ती
करवा चौथ से है चन्द्र देव की पुष्टि
शेष देव हो गए हैं यदि मृत नहीं तो मृतक समान
भगवान भी नहीं रख रहे हैं उनका ध्यान
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---३० अक्टूबर २०११