Saturday, May 14, 2011

बिन लादन पत्नी विलाप


(बिन लादन की पत्नियाँ अभी भी रो रही हैं किन्तु उनका दृष्टिकोण कुछ बदल रहा है।)

तेरे बिन लादन लागे न जीया हमार।
बार बार तोहें का समझाऊँ, गोलिन की भरमार।
तुमका मिलिहैं बहत्तर हूरैं, हमरी का दरकार।
तेरे बिन लादन---

तुम्हरे परी ओसामा, ओबामा की मार।
पाँच बीवियाँ, चालिस बच्चा, अब का करिहैं यार।
सबकै माटी पलीद कराई, करि जिहाद को वार।
तेरे बिन लादन---

अब हम कहाँ जायँ का करिहैं, हमैं बताऔ यार।
नफरत कै दुनिया फैलाई, तुम जिहाद करि यार।
सरग गए की नरक गए तुम, अब हम करैं विचार।
सरग गए तो डियर ओसामा, हूरन की भरमार।
नरक गए तो करम फूटिगे, अब तुम्हरे भरतार।
तात तेल माँ जाव खौलाए, मरे न मरिहौ यार।
तेरे बिन लादन---

---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---१३ मई २०११

7 comments:

मनोज कुमार said...

रोचक कविता। पढ़कर मज़ा आ गया।

Anonymous said...

Marvelous ! keep on brother ; you are cooking good.'Habeeb'/usa/jio

Anonymous said...

Guptaji: Very good.
The language (Awadhi?) you chose to write this makes it much more enjoyable. Keep it up with the good work.
-Anand

Anonymous said...

सुंदर!

अब खड़ी बोली में भी--

हमको छोड़ गए बिन लादेन दिन अब कैसे गुज़रेंगे
उनको मिलीं बहत्तर उन बिन दिन अब कैसे गुज़रेंगे.

--ख़लिश

अनूप शुक्ल said...

मजे आय गया लक्ष्मी भैया! बहुत दिन के बाद आये इहां!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

रोचक प्रस्तुति

चंदन कुमार मिश्र said...

अच्छा लगा।