क्या अभी आपने सोचा है
जब कोई मर जाता है
कहते हैं भगवान को प्यारे हो गए
यदि आप किसी से कहें
कि फलाँ सख़्श भगवान
को प्यारा हो गया
तो वह यही समझेगा कि
वह सख़्श मर गया
यानी कि भगवान को प्यारा होना
और मर जाना एक ही बात है
भगवान का भजन करने वालों के लिए
यह कठिन सवाल उठता है
यदि आप बहुत ही निष्ठा से भजन करेंगे
तो भगवान को प्यारे लगने लगेंगे
और फिर आप भगवान को प्यारे हो जायेंगे
यानी कि मर जायेंगे
अब यह सत्य है कि किसी
को भी मरने का आइडिया
पसन्द नहीं आता
कोई आश्चर्य है कि
कोई बिरला ही
भगवान का सच्चा
भक्त होता है
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---२८ मार्च २०११
6 comments:
लक्ष्मी जी , आपको मेरा प्रणाम पहुंचे ...
आपकी बात विचारनीय है
भगवान् को प्यारा कौन हो सकता है ?
जिसका मन विकार रहित हो ?
जो स्वयं की सत्ता को समझ लेता है
परम सत्ता से मिल जाता है
संभवतः, वही " भगवान् को प्यारा" हो जाता है
देखा जाए तो क्या यही मानव का परम लक्ष्य नहीं,
कि स्वयं को जान लिया जाए ?
उस आनंद की कल्पना करना न तो हमारी सोच के दायरे में है
और न ही ईश्वर ने हमें इसको अनुभूत करने की अनुमति ही दी है
इस विचार को बांटने के लिए आपका धन्यवाद
स्नेह,
सर्वज्ञ शर्मा
He Bhagwan tujhe pyaar karana bhi is dunia mai khatarnak ho gaya hai.
-Anand
भगवान को प्यारा होना मतलब भगवान की सत्ता में आत्मसात हो जाना इस मोह माया को भूल कर भगवान के रूप में विलीन हो जाना..
हम रोजमर्रा के बोल चल में इसे मरना बोल देते है...
भगवान को प्यार करना और भगवान को प्यारा होना दोनों दो बातें है..
धन्यवाद श्रीमान
Kunal wrote: "shakespeare would have said: to worship or not to worship: that is the question"
आप सभी को टिप्पणी डालने के लिए धन्यवाद। आशुतोष जी, जो भगवान से प्रेम करता है वही भगवान को प्यारा हो सकता है और बिना मरे कोई भगवान में विलीन नहीं हो सकता। आप और सर्वज्ञ जी बहुत ही गम्भीर प्रकृति के लगते हैं। आप लोग भुल गे कि यह एक हास्य कविता है।
Jab aap duniya se ub jaye tab bhagwan ko yaad kare tab woh apko pyar karaenge
Nishi
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