Monday, March 28, 2011

भगवान को प्यारे


क्या अभी आपने सोचा है
जब कोई मर जाता है
कहते हैं भगवान को प्यारे हो गए
यदि आप किसी से कहें
कि फलाँ सख़्श भगवान
को प्यारा हो गया
तो वह यही समझेगा कि
वह सख़्श मर गया
यानी कि भगवान को प्यारा होना
और मर जाना एक ही बात है

भगवान का भजन करने वालों के लिए
यह कठिन सवाल उठता है
यदि आप बहुत ही निष्ठा से भजन करेंगे
तो भगवान को प्यारे लगने लगेंगे
और फिर आप भगवान को प्यारे हो जायेंगे
यानी कि मर जायेंगे

अब यह सत्य है कि किसी
को भी मरने का आइडिया
पसन्द नहीं आता
कोई आश्चर्य है कि
कोई बिरला ही
भगवान का सच्चा
भक्त होता है

---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---२८ मार्च २०११

6 comments:

Anonymous said...

लक्ष्मी जी , आपको मेरा प्रणाम पहुंचे ...

आपकी बात विचारनीय है

भगवान् को प्यारा कौन हो सकता है ?
जिसका मन विकार रहित हो ?

जो स्वयं की सत्ता को समझ लेता है
परम सत्ता से मिल जाता है
संभवतः, वही " भगवान् को प्यारा" हो जाता है

देखा जाए तो क्या यही मानव का परम लक्ष्य नहीं,
कि स्वयं को जान लिया जाए ?

उस आनंद की कल्पना करना न तो हमारी सोच के दायरे में है
और न ही ईश्वर ने हमें इसको अनुभूत करने की अनुमति ही दी है

इस विचार को बांटने के लिए आपका धन्यवाद

स्नेह,
सर्वज्ञ शर्मा

Sarvanand said...

He Bhagwan tujhe pyaar karana bhi is dunia mai khatarnak ho gaya hai.
-Anand

आशुतोष said...

भगवान को प्यारा होना मतलब भगवान की सत्ता में आत्मसात हो जाना इस मोह माया को भूल कर भगवान के रूप में विलीन हो जाना..
हम रोजमर्रा के बोल चल में इसे मरना बोल देते है...
भगवान को प्यार करना और भगवान को प्यारा होना दोनों दो बातें है..
धन्यवाद श्रीमान

Anonymous said...

Kunal wrote: "shakespeare would have said: to worship or not to worship: that is the question"

Laxmi N. Gupta said...

आप सभी को टिप्पणी डालने के लिए धन्यवाद। आशुतोष जी, जो भगवान से प्रेम करता है वही भगवान को प्यारा हो सकता है और बिना मरे कोई भगवान में विलीन नहीं हो सकता। आप और सर्वज्ञ जी बहुत ही गम्भीर प्रकृति के लगते हैं। आप लोग भुल गे कि यह एक हास्य कविता है।

Anonymous said...

Jab aap duniya se ub jaye tab bhagwan ko yaad kare tab woh apko pyar karaenge

Nishi