आपने शायद बिहारी का यह दोहा सुना होगा:
करि फुलेल को आचमन मीठो कहत सराहि।
रे गंधी मतिमन्द तू इतर दिखावत काहिं।।
नीचे दिया कार्टून विचारों की सार्वभौमिकता का उदाहरण है। बिहारी का यही विचार इस कार्टूनिस्ट को भी आया है, तीन चार सौ साल बाद। देखिये:
इस कार्टून स्ट्रिप का नाम है, "विज़र्ड अॅाफ़ इड।"
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---४ मार्च २०११
करि फुलेल को आचमन मीठो कहत सराहि।
रे गंधी मतिमन्द तू इतर दिखावत काहिं।।
नीचे दिया कार्टून विचारों की सार्वभौमिकता का उदाहरण है। बिहारी का यही विचार इस कार्टूनिस्ट को भी आया है, तीन चार सौ साल बाद। देखिये:
इस कार्टून स्ट्रिप का नाम है, "विज़र्ड अॅाफ़ इड।"
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---४ मार्च २०११

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