Monday, December 20, 2010

ग़ज़ल और गाजर

जी हाँ हुजूर मैं कविता करता हूँ         (भवानी प्रसाद मिश्र के सौजन्य से)
कभी कभार शेर-ओ-शायरी भी लिखता हूँ

अभी अभी पढ़ा बी बी सी पर एक समाचार
संगीत और सब्ज़ी का समन्वय मनुहार
(http://www.bbc.co.uk/news/world-12037155)

सुन्दर बालाएँ मंच पर गाने गाती हैं
गायन के बाद प्याज़ के गुच्छे बाँटती हैं
प्याज़ पैदा करने वाले और कन्सर्ट जाने वाले
दोनों ही से पैसे लेती हैं

मै भी सोच रहा हूँ
कि अपनी कविताओं को सब्ज़ियों की तरफ मोड़ दूँ
ग़ज़ल को गाजर से जोड़ दूँ
भारत का बेटा हूँ
और कुछ नहीं तो समन्वय समझता हूँ

मैं भी किसानों से सम्पर्क बढ़ाऊँगा
सब्ज़ियों के प्रमोशन के लिए कान्ट्रैक्ट साइन करूँगा
हर कविता पाठ के बाद सब्ज़ियाँ बाँटूँगा
कभी प्याज़ कभी मिर्च बाटूँगा
कभी लौकी कभी तुरई बाँटूँगा
कद्दू की करामात हो सकती है
मेरी कविता भी ज़ायक़ेदार हो सकती है

आपका क्या ख़्याल है बताइए
थोड़ा हरा धनिया साथ लेते जाइए

---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---२० दिसम्बर २०१०

6 comments:

Anonymous said...

Well said. : Per meri bhi suno
B.Sc,(Ag.) hone se men achhe pyaz ugaongaa
Laxmi ke saath chal ker , men bhi lakshmi bkamaunga.

---Bhagavan Gaur

Sudhakar said...

Have you thought of publishing your poem compilation?

Anonymous said...

Hello Phuphaji
Isko tukbandi bol sakte hai..its funny and current. Today morning TOI the headlines are on soaring onion prices!!
 
Warm Regards
Anju 

Anonymous said...

sabjiye lucknow kab bhej rahe hai :)

Kunal

Anonymous said...

आ० गुप्त जी,
ग़ज़ल,गाजर,प्याज सब्जी का मिलाजुला व्यापार-समन्वय हेतु आपको
मेरी शुभ-कामनाएं | भारत में प्याज ६० रुपये किलो बिका रही है | आज
का समाचार है कि पकिस्तान से मंगाई जाएगी | सब्जी प्याज के साथ
गजल-व्यापार के भी अच्छे अवसर हैं चूकिए नहीं |
कमल

Anurag said...

Uncle,

Nicely written and refreshing point of view. By the way "sabziyan" organic hongee ya phir usual stuff. Maine isliye poochaa kyonkee aapkee kavita to definitely organic hai.

Anurag