पहले पढ़िए:
http://www.rationalistinternational.net/article/2008/20080310/en_1.html
तांत्रिक और नास्तिक में बहस हो गई
बड़े कमाल की यह बात हो गई
राष्ट्रीय टीवी पर एक झड़प हो गई
जो सीखना चाहें उनके लिए शिक्षा की बात हो गई
तांत्रिक ने कहा मै मंत्रों का प्रयोग जानता हूं
चाहू तो मंत्रों से आपको जान ले सकता हूँ
नास्तिक ने कहा अब देर न लगाइए
मैं तैयार हूँ मुझे मंत्रों से मार डालिए
टीवी वालों ने सारे प्रोग्राम बर्खास्त कर डाले
जनता जिससे तांत्रिक की विद्या आजमा ले
तांत्रिक ने बड़ा सारा मंत्र प्रहार किया
नास्तिक को सिर दर्द तक नहीं हुआ
स्वामी ने नास्तिक के सर पर चाकू घुमाई
मंत्राभिषिक्त जल की फिर की छिड़काई
उसके सिर को फिर अपने हाथों से छुआ
नास्तिक का बाल बाँका तक नहीं हुआ
तांत्रिक ने कहा जरूर इसने अवश्य भगवान से विनती की होगी
नास्तिक ने कहा अवश्य ही आपकी बुद्धि भ्रष्ट हुई होगी
यह बाजी तो नास्तिक के हाथ लग गई
प्रभु ही सिखायेंगे तांत्रिक को कोई ट्रिक नई
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---२९ मार्च २०१०
2 comments:
बहुत सही!!
हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!
लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.
अनेक शुभकामनाएँ.
समीर जी,
टिप्पणी के लिए धन्यवाद। आपकी सलाह सही है। प्रयास करूँगा।
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