Wednesday, February 03, 2010

वायाग्रा का मूल



कुछ भारतीयों का विश्वास है कि भारत हर वस्तु या आविष्कार का मूल स्थान है। ऐसा विश्वास करने वालों के लिए कुछ 'तथ्य' प्रस्तुत कर रहा हूँ:


१। वायाग्रा का मूल भारत है क्योंकि यह शब्द संस्कृत शब्द व्याघ्र से बना है:


व्याघ्र --> व्याघ्रा -->वायाग्रा (अपभंश)


२। कनाडा कुछ कन्नड़ भाषा भाषियों ने बसाया होगा तभी तो कनाड़ा नाम पड़ा है।


३। अमेरिका के आदिवासियों को इन्डियन कहा जाता है। आपको शायद पता नहीं होगा कि ये लोग वास्तव में भारतीय ही हैं। जब त्रेता युग में सुग्रीव ने वानरों को पाताल देश भेजा तब उनसे कहा गया था कि यदि सीता का पता नहीं लगा पाओगे तो लौटने पर मृत्यु के भागी बनोगे। आप यह तो जानते ही होंगे कि ये वानर मनुष्य ही थे।


वानर = वन में रहने वाला नर


जब ये बिचारे वानर सीता का पता नहीं लगा पाए तो यहीं अमेरिका में ही रह गए। इस बात के कुछ प्रमाण अभी भी पाए जाते है। राचेस्टर नगर में- जहाँ मैं रहता हूँ- जेनेसी नदी बहती है। अवश्य ही इस नदी का नाम गणेशी रहा होगा जो कालांतर से जेनेसी बन गया।


४। दक्षिण भारत में प्राचीन काल में पल्लव राजा राज्य करते थे। ये जब उत्तर में ईरान पहुँचे तो पहलवी बन गए। ईरान के आखिरी सम्राट का नाम शाह रज़ा पहलवी था। वास्तव में कुछ पाश्चात्य विद्वानों ने इसका उल्टा कहा है। मेरे विचार में उनका यह विचार कोरा पागलपन है।


---लक्ष्मीनारायण गुप्त

---३ फरवरी २०१०

6 comments:

Udan Tashtari said...

तभी आजकल आप काफी शोध में व्यस्त रहते हैं. :)

Arvind Mishra said...

रोचक मगर कुछ हास्य भी !

Raviratlami said...

बढ़िया विश्लेषण है. खासकर वायाग्रा का. इस मजेदार सीरीज को जारी रखा जाए ये आग्रह है. :)

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

हाँ , हास्य तो बढियां है !
तथ्य की परवाह यहाँ नहीं करूँगा ! हंसने के लिए ! आभार !!!

krishan said...

Aur shayad aapko yeh bhi yaad hoga ki Shakespear india ka rahne waala tha aur uska asli naam Shekhu Peer tha :)

Laxmi N. Gupta said...

समीर जी, अरविन्द जी, रवि जी, अमरेन्द्र जी एवं कृषन जी,

उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।