Thursday, January 28, 2010

मेषारूढ़े हनुमते



पिछले सप्ताहान्त में स्थानीय हिन्दू मन्दिर में अखंड रामायण में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। पाठ प्रारम्भ होने के पहले पुजारी जी सभी देवी देवताओं का आवाहन कर रहे थे। हनुमान जी के आवाहन में सुनाई दिया:


मेषारूढ़े हनुमते


मेढ़े पर चढ़े हनुमान जी का मनोचित्र ज़रा अज़ीब सा लगा। फिर सुनाई दिया:

रथारूढ़े हनुमते

हंषारूढ़े हनुमते

अश्वारूढ़े हनुमते

पुष्पकारूढ़े हनुमते (यह तो ठीक है क्योंकि हनुमान जी पुष्पक विमान पर सभी के साथ अयोध्या आये थे।)


मैं सोच रहा था कि सबसे उचित आवाहन होगा:

वृक्षारूढ़े हनुमते

किन्तु यह नहीं सुनाई दिया।


मैं सोचने लगा कि यदि कोई धार्मिक चित्रकार इन सभी वाहनों पर आरूढ़ हनुमान जी के चित्र बनाए तो सफलता मिलेगी। सभी पनवाड़ियों की दूकानों पर और धर्मभीरु जनता के आवासों पर ये चित्र लगेंगे। यह और भी उत्तम होगा यदि यह सूची अपटूडेट कर दी जाए यानी ये मंत्र भी जोड़ दिए जाएं:


द्विचक्रिका रूढ़े हनुमते (द्विचक्रिका = बाइसिकिल, स्कूटर, मोपेड या मोटर साइकल)

लौहपथगामिनी रूढ़े हनुमते (लौहपथगामिनी = ट्रेन)

जलयाने रूढ़े हनुमते

यायुयाने रूढ़े हनुमते

इत्यादि, इत्यादि।


आखीरकार हनुमान जी पवन पुत्र होने के नाते किसी भी वाहन पर आरूढ़ हो सकते हैं।


मैंने भी पढ़ने में भाग लिया। परेशानी तब होती थी जब बिना किसी सूचना के मुख्य पाठक सम्पुट पे सम्पुट जोड़ने लगते हैं। जब मैं उनका साथ नहीं दे पारहा था तब मैंने पढ़ना छोड़ दिया।


अधिकांश लोग जो अवधी क्षेत्र से नहीं हैं ग़लत सलत उच्चारण करते हैं और जो पढ़ते हैं उसका अर्थ नहीं जानते हैं। किन्तु हमारे धर्म में समझने का नहीं पाठ का महत्व माना जाता है।


पाठ के अन्त के पास एक चौपाई आती हे कि भगवान राम कि कृपासे मच्छर भी बृह्मा बन सकता है और बृह्मा मच्छर। अगली बार किसी मच्छर को मारें तो यह विचार अवश्य करें कि यदि यह मच्छर बृह्मा बनने वाला है तो यह आपके साथ क्या करेगा।


---लक्ष्मीनारायण गुप्त

---२८ जनवरी २०१०




1 comment:

Krishan Mago said...

Geeta says ..."karmaniye hi vadhu karaste, ma faleshu kadachana." So, kill the machar if it is bothering you and don't worry about what it will do to you as Brahma.;)
krishan