Wednesday, December 16, 2009

सबसे सुखी कौन?

प्राचीन काल में लिडिया नामके देश (आधुनिक तुर्की का एक भाग) में क्रोसस नामका विख्यात राजा था। इस राजा के पास अपार धन- सम्पत्ति थी और उसे इस बात का बड़ा गर्व था। एक बार सोलन नाम का यूनानी राजनेता क्रोसस से मिलने आया। सोलन अपने ज्ञान, बुद्धिमत्ता और उत्तम चरित्र के लिए मशहूर था। क्रोसस ने जब राजा के धन के बारे में कुछ नहीं कहा तो वह उससे दुनिया के सुखी व्यक्तियों के बारे में पूछने लगा। सोलन ने कुछ प्रसिद्ध मृत व्यक्तियों के उदाहरण दिए कि वे सब सुखी थे किन्तु क्रोसस के बारे में कुछ नहीं कहा। हार कर क्रोसस को सीधे ही पूछना पड़ा कि क्या सोलन ने उसके जैसा धनी और सुखी व्यक्ति कहीं देखा है। सोलन ने कहा कि किसी भी जीवित व्यक्ति का जीवन सुखी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि भाग्य से जो मिला है वह दुर्भाग्य से जा भी सकता है। इसलिए मरने के बाद ही किसी को सुखी या दु:खी कहा जा सकता है।

इस घटना के वर्षों बाद क्रोसस ईरान के राजा डेरियस से युद्ध में हारा और उसको ज़िन्दा जलाने का प्रबन्ध किया जा रहा था। क्रोसस को सोलन की बात याद आई और उसने चिल्ला कर कहा कि सोलन तुम ने ठीक कह रहे थे। डेरियस ने कौतुहल-वश क्रोसस से पूछा कि वह क्या कह रहा है। क्रोसस ने उसे सोलन के साथ अपना पूर्व सम्वाद सुनाया जिसे सुन कर डेरियस इतना प्रभावित हुआ कि उसने क्रोसस की जान बख्श दी।

---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---१६ दिसम्बर २००९