
क्या कभी आपने सोचा है कि गधा दुनिया का सबसे अधिक अपमानित जानवर है और इसमें इसकी अपनी कोई ग़लती नहीं है। यह बहुत ही मेहनती जानवर है जिसके बगैर कुम्हार और धोबी की जीविका नहीं चल सकती, कम से कम दक्षिण एसिया में। दिन रात बिना उफ़ किये काम करता है बस थोड़े से चारे के लिये। उसके पिछले पैरों में बेड़ी डाल दी जाती है जिससे वह दुलत्ती मार कर आत्मरक्षा भी नहीं कर सकता। जो आधा गधा है यानी खच्चर, वह भी भारी बोझा ढोकर इन्सान की महान सेवा करता है।
इन सेवाओं के बदले में समाज उसे क्या देता है: डंडे और गालियाँ। जो महा मूर्ख होता है उसकी तुलना गधे से की जाती है। अमरीका जैसे विकसित देश में भी जब कोई मूर्खता का काम करता है तो कहते हैं,"What an ass!"हालांकि आज तक किसी ने भी किसी गधे को ऐसी मूर्खता करते नहीं देखा। जब किसी को लज्जित और अपमानित करना होता है तो हमारे मुल्क में उसका मुंह काला कर गधे पर उलटा मुंह बिठा कर शहर में घुमाते हैं
मनुष्य तो मनुष्य, भगवान भी गधों के ख़िलाफ है। भगवान ने मछली का, वाराह का, कछुए का और सिंह का अवतार लिया किन्तु गधे के रूप में अवतार लेने का कभी सोचा भी नहीं।
यह सब विचार ऊपर दिये हुए चित्र से जागृत हुए। हैदराबाद में एक गधे और गधी का विवाह कराया गया। यह मुझे पता नहीं है कि कयों इन्द्रदेव गधे और गधी के विवाह से प्रसन्न होते हैं और बादलों को बरसने की आज्ञा देते हैं। बिचारे गधे की कद्र कोई तो करता है। मेरे बचपन में जब परिवार में किसी को शीतला (चेचक) निकलती थीं तो गधे को चने खिलाते थे। कहते थे इससे शीतला देवी प्रसन्न होकर चेचक का दु:ख निवारण करती हैं। ऐसा क्यों है, मुझे पता नहीं। ईसाइयों के धर्मग्रन्थ बाइबल में भी आया है कि ईसा मसीह जब आखिरी बार यरूसलम जाते हैं तो गधे पर चढ़ कर जाते हैं। लोग कहते हैं कि गरज पड़ने पर गधे को भी दादा कहना पड़ता है।
ओम् श्री रासभाय नम:
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---१९ अगस्त २००९