Thursday, August 13, 2009

पंढरपुर के विठोबा



महाराष्ट्र के पंढरपुर नामक नगर में विठोबा (विट्ठल) और रुक्मिणी का मन्दिर है। इस मन्दिर से जुड़ी हुई कहानी बड़ी अद्भुत है।


कहते हैं कि पंढरपुर में पुन्डलीक नाम का एक युवक रहता था। उसकी भगवान विष्णु पर बहुत श्रद्धा थी और वह भगवान के दर्शन की इच्छा करता रहता था। उसकी परम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान रात्रि में उसके दरवाजे पर आए किन्तु वह उस समय अपने माता-पिता की सेवा में इतना तल्लीन था कि वह पूरी सेवा-सुश्रुषा किये बिना भगवान का स्वागत तक नहीं कर सका। उसने भगवान के लिये एक ईंट रख दी और भगवान से इन्तज़ार करने के लिये कहा। माता-पिता की सेवा में सारी रात बीत गई और सवेरा हो गया। लोगों के मार्ग से निकलने का समय आ गया। ईंट पर हुए विष्णु ने अपने आपको मूर्ति में परिवर्तित कर दिया। पुन्डलीक की माता-पिता पर इतनी श्रद्धा से भगवान इतने प्रसन्न हुए कि सदा के लिये मूर्ति बन कर उसके पास आ गए। कोई भी कार्य जो पूर्ण श्रद्धा से किया जाता है वह प्रभु की पूजा की तरह है। पूर्ण श्रद्धा से अहंकार मिट जाता है और ऐसा होते ही सब प्रभुमय हो जाता है।


मान्यता है कि पंढरपुर के मंदिर में यही मूर्ति विराजमान है। मुझे नहीं पता कि राधा की जगह रुक्मिणी यहाँ पर क्यों हैं। जहाँ तक मुझे पता है कृष्ण और रुक्मिणी का यह केवल एक ही मंदिर है और सब जगह अधिकांश राधा और कृष्ण की पूजा होती है। जगन्नाथपुरी में कृष्ण, बलराम और सुभद्रा की पूजा होती है। पुरी के बारे में भी अवश्य कोई कहानी होगी। हो सकता है मेरे किसी पाठक को पुरी के बारे में ज्ञान हो। यदि ऐसा है तो अवश्य लिखें।


---लक्ष्मीनारायण गुप्त

---१३ अगस्त २००९

2 comments:

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Behad achchee Post lagee Laxmi Bhai sahab

Aabhaar !!

kalim said...

दिल में उतर जाने वाली पोस्ट की हॆ आप ने। ऊपर वाले की नज़र में मां बाप का किया मक़ाम हॆ। ये सबक़ इस से मिलता हॆ। सच हॆ मां के पॆर के नीचे जन्नत हॆ।