Wednesday, December 24, 2008

एक मच्छर के उद्गार

(पहले पढ़िएः http://www.bbc.co.uk/hindi/news/story/2008/12/081223_mosquito_dna_ri.shtml)
अगर इस दुनिया में कोई भगवान होता
मच्छरों पर नाहक ही इतना जुल्म नहीं होता

हम मच्छर जीने के लिए खून पीते हैं
इन्सान तो बेवजह ही हमें सजाए-मौत देते हैं

हम अगर आदतन भनभनाते हैं
उसकी हथेली या स्वाटर के शिकार बन जाते हैं

इन्सान करता है इन्सानियत की बात
मच्छरों को लेकिन पता है सही बात

लानत है इसकी इन्सानियत पर
सभी जानवर हैं इसमें एकमत

मरके भी हम करते हैं इन्सान की भलाई
जैसे मरके एक मच्छर ने यह चोरी सुलझाई

एक इन्सान ने एक कार चुराई
एक मच्छर बन्धु ने थोड़ी सी उसे चुटकी लगाई

पुलिस को देगया वह मच्छर दिखाई
थैली के खून की शिनाख्त कराई

जो था उस खून का डी एन ए प्रिन्ट
एक चोर के डी एन ए से होगया फिट

चोर की तो गिरफ्तारी होगई
लेकिन एक बेकसूर मच्छर की मौत होगई

---लक्ष्मीनारायण गुप्त
--- २००८-१२-२४