
(27 जून 08 की “The Week” पत्रिका से साभार)
खुदा की बड़ी उसपे मेहर हो गई
एक सुअर की बच्ची को एलर्जी हो गई
सुअर-कन्या को कीचड़ से एलर्जी हो गई
सुअरत्व के खिलाफ यह बात हो गई
सुअर को दलदल से नफरत हो गई
बड़े कमाल की यह बात हो गई
सिन्डर्स नामसे सुअर-कन्या जानी गई
भाई बहनों के साथ कीचड़ में खेलने न गई
बारह साल की एली उसकी मालकिन द्रवित हुई
सिन्डर्स की दशा उससे देखी न गई
बड़े कमाल-------
सिन्डर्स को नन्ही नन्ही बूटियाँ पहनाई गईं
खुशी खुशी सिन्डर्स फिर कीचड़ में गई
एली की वह पेट सुअरिया बन गई
हैम और सासेज बनने से वो बच गई
बड़े कमाल---------
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---२३ जून २००८