सुना है जापान के एक ज़ेन बौद्ध मंदिर में बड़ा चमत्कार हुअा है
एक कुत्ते को भगवान बुद्ध से बड़ा प्यार हुअा है
वह अपने स्वामी के साथ मंदिर जाता है
और पिछले पंजों पर खड़ा होकर अगले पंजों को हाथों की तरह जोड़ता है
सुना है उस मंदिर में श्रद्धालु भक्त भारी संख्या में आ रहे हैं
मंदिर की महिमा और चढ़ावे में वृद्धि ला रहे हैं
इस आख्यान से मेरे मन में एक महान विचार आया है
विश्व कल्याण का एक मार्ग सामने आया है
यदि सभी धर्मास्थलों में यही युक्ति अपनायें
सभी भक्त गण अपने अपने पशुओं को लायें
हाथी, घोड़े, बिल्ली कुत्तों और चूहों को लायें
उन्हें बंदगी, पूजा, सिज़दा करना सिखायें
इन पशु उपासकोँ को देख कर बेधरम मानव शरमायेंगे
और धर्मास्थलों की तरफ पग बढ़ायेंगे
तन मन धन से प्रभु और मंदिर की सेवा करेंगे
अब आप सोचिये कितना लाभ होगा
जन कल्याण होगा
पशु कल्याण होगा
मंदिर कल्याण होगा
पुजारी कल्याण होगा
कोई अतिशयोक्ति नहीं यह कहने में
कि विश्व कल्याण होगा
...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...२७ मार्च २००८
पुनश्च: यहाँ देखिये वह समाचार जिस पर यह कविता बनी है:
http://news.xinhuanet.com/english/2008-03/25/content_7854736.htm
At present, this blog is set up to publish my Hindi poems and accept comments from the readers. Some contributions from others are also published from time to time. Laxmi N. Gupta
Thursday, March 27, 2008
Wednesday, March 19, 2008
होली की बेला
होली की बेला है, प्रवासी अकेला है
नहीं जलती इस देश में होली की ज्वाला है
दिखती नहीं यहाँ पर उपलों की माला है
गोझियों का भोग भी कहाँ लगने वाला है
होली की...
नहीं जानता यहाँ पर कोई प्रह्लाद की कहानी
हिरण्यकसिपु और होलिका की साजिश और बेईमानी
नहीं जानता कोई कान्हा और राधा के रास की कहानी
होली की...
नहीं उड़ाता हैं कोई यहाँ पर धुलहठी की धूल अम्बर तक
फागमण्डलियों के जोशीले सुर यहाँ नहीं जाते गगनमण्डल तक
कबीरें नहीं गाता कोई यहाँ धूल उड़ाने पर
होली की...
पिचकारियों से यहाँ कोई रंग नहीं चलाता
न ही अबीर और गुलाल कोई मुँह पर लगाता
न ही कोई हँस के गले से लगाता
होली की...
नहीं होता यहाँ होली पर हँसी और मजाक
न ही अल्हड़ जवानी का हास-परिहास
बूढ़े भी करते थे वहाँ होली पर रसिकपन की बात
होली की...
कहाँ है यहाँ युवा वृन्द का अविरल उत्साह
दिखता नहीं यहाँ बाल वृद्धों का उमड़ता हुलास
न ही भाभियों के चेहरों पर रंग और गुलाल
होली की...
...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...१९ मार्च २००८
नहीं जलती इस देश में होली की ज्वाला है
दिखती नहीं यहाँ पर उपलों की माला है
गोझियों का भोग भी कहाँ लगने वाला है
होली की...
नहीं जानता यहाँ पर कोई प्रह्लाद की कहानी
हिरण्यकसिपु और होलिका की साजिश और बेईमानी
नहीं जानता कोई कान्हा और राधा के रास की कहानी
होली की...
नहीं उड़ाता हैं कोई यहाँ पर धुलहठी की धूल अम्बर तक
फागमण्डलियों के जोशीले सुर यहाँ नहीं जाते गगनमण्डल तक
कबीरें नहीं गाता कोई यहाँ धूल उड़ाने पर
होली की...
पिचकारियों से यहाँ कोई रंग नहीं चलाता
न ही अबीर और गुलाल कोई मुँह पर लगाता
न ही कोई हँस के गले से लगाता
होली की...
नहीं होता यहाँ होली पर हँसी और मजाक
न ही अल्हड़ जवानी का हास-परिहास
बूढ़े भी करते थे वहाँ होली पर रसिकपन की बात
होली की...
कहाँ है यहाँ युवा वृन्द का अविरल उत्साह
दिखता नहीं यहाँ बाल वृद्धों का उमड़ता हुलास
न ही भाभियों के चेहरों पर रंग और गुलाल
होली की...
...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...१९ मार्च २००८
Sunday, March 09, 2008
हिलरी वन्दना
हिलरी महरानी नमो नमो
बिल की पटरानी नमो नमो
दिलेर सिंहिनी नमो नमो
बराक-सिर-पीड़ा नमो नमो
न्यूयार्क सेनेटर नमो नमो
सर्वस्वास्थ्यक्षेम प्रस्ताविनी नमो नमो
निर्धनहितकारिणि नमो नमो
चेलसी की अम्मा नमो नमो
डी सी विहारिणी नमो नमो
तुम हमको भाई नमो नमो
बस प्राइमरी जीतो नमो नमो
मैकेन को हराओ नमो नमो
व्हाइटहाएस पहुँचो नमो नमो
बिल को वहाँ लाओ नमो नमो
ईराक बचाओ नमो नमो
हम जैसों का रिटायरमेंट बचाओ नमो नमो
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---९ मार्च २००८
बिल की पटरानी नमो नमो
दिलेर सिंहिनी नमो नमो
बराक-सिर-पीड़ा नमो नमो
न्यूयार्क सेनेटर नमो नमो
सर्वस्वास्थ्यक्षेम प्रस्ताविनी नमो नमो
निर्धनहितकारिणि नमो नमो
चेलसी की अम्मा नमो नमो
डी सी विहारिणी नमो नमो
तुम हमको भाई नमो नमो
बस प्राइमरी जीतो नमो नमो
मैकेन को हराओ नमो नमो
व्हाइटहाएस पहुँचो नमो नमो
बिल को वहाँ लाओ नमो नमो
ईराक बचाओ नमो नमो
हम जैसों का रिटायरमेंट बचाओ नमो नमो
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---९ मार्च २००८
Wednesday, March 05, 2008
बराक की आशा
बराक ओबामा
लोचन अभिरामा
तनु घनश्यामा
संग मिशैल
भारी है आशा
आशा परिवर्तन
यही संदेशा
न करो अँदेशा
बस भेजो पैसा
बराक की आशा
दिल खोलो अपना
खोलो बटुआ
भेजो चन्दा
मुझे जिताओ
तव मत की आशा
न करो निराशा
मुझे जिताओ
राष्ट्रपति बनाओ
समझो बराक की भाषा
यह बराक की आशा
करो आशा की हिम्मत
तब होगी बरकत
परिवर्तन माँगो
करूँगा वादे पूरे
नहीँ छोड़ूँगा अधूरे
मैं तुम्हरी आशा
तुम मेरी आशा
न करो निराशा
बराक की आशा
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---५ मार्च २००८
लोचन अभिरामा
तनु घनश्यामा
संग मिशैल
भारी है आशा
आशा परिवर्तन
यही संदेशा
न करो अँदेशा
बस भेजो पैसा
बराक की आशा
दिल खोलो अपना
खोलो बटुआ
भेजो चन्दा
मुझे जिताओ
तव मत की आशा
न करो निराशा
मुझे जिताओ
राष्ट्रपति बनाओ
समझो बराक की भाषा
यह बराक की आशा
करो आशा की हिम्मत
तब होगी बरकत
परिवर्तन माँगो
करूँगा वादे पूरे
नहीँ छोड़ूँगा अधूरे
मैं तुम्हरी आशा
तुम मेरी आशा
न करो निराशा
बराक की आशा
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---५ मार्च २००८
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