Monday, January 14, 2008

पति-पत्नी कोठे पर

यह कविता निम्न सत्य घटना पर अाधारित है:

http://www.reuters.com/article/oddlyEnoughNews/idUSN0959912720080109 


चौदह साल जब शादी के हुए
रोमांस फीका हुअा, मद्धिम हुए दिलों के दिये
पत्नी ने पति से पूछा
कि वह कहीं पार्ट-टाइम काम कर ले
पति को क्या शिकायत हो सकती थी
मान लिया
एक दिन पति को कामदेव ने सताया
नहीं रहा गया जब
तब कोठे पर अाया
जैसे ही वह कोठे पर पहुँचा
पत्नी को वहाँ पर देख कर चौंका
बोला, तुम यहाँ क्या कर रही हो
पत्नी ने उत्तर दिया,
वही जो अाप कर रहे हैं

सुना है वे अब तलाक देने वाले हैं
मैं नहीं समझा ऐसा क्यों है
अब तो दोनों को एक कामन इन्टेरेस्ट मिल गया है
वेश्यालय में दोनों का दिल लग गया है
मेरी तो दम्पति को यही सलाह है
वेश्यालय में कर डालो फिर से विवाह है
वहीं पर अपने वादे दुहराओ
और फिर जमके उत्सव मनाओ

...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...१४ जनवरी २००८

2 Comments:

At 3:19 PM, Blogger राकेश खंडेलवाल said...

एक लम्बे अरसे के बाद आपको ब्लाग पर देखा. अच्छी रचना है

 
At 12:28 PM, Blogger Laxmi N. Gupta said...

राकेश जी,

धन््यवाद। अाजकल अधिक लिख नहीं रहा हूँ।

 

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