पत्नी नाम, पत्नी नाम, पत्नी नाम जपिए
जाही विधि राखे बीवी ताही विधि रहिए।
खिचड़ी खिलावे वो तो खिचड़ी से खुश रहिए
पकौड़ी खिलावे तो आप चटनी बनाइए।
पत्नी नाम....
सब्ज़ी वो बनावे तो प्याज़ आप काटिए
पति धर्म पालन में आँसू बहाइए।
पत्नी नाम....
खाना वो बनावे तो बर्तन आप धोइए
वोह थक जाए तो चरण भी दबाइए।
पत्नी नाम...
पत्नी को रिझाने हेतु काम सब करिए
तोंद बढ़ रही तो जिम नित जाइए।
पत्नी नाम...
पत्नी लात मोरे तो उसके तलवे सहलाइए
भृगु और विष्णु की कहानी याद करिए।
पत्नी नाम...
घर से निकाले तो लान में घास काटिए
दया दृष्टि होवे जब घर में फिर घुसिए।
पत्नी नाम...
छुट्टी जब होवे उसे बाहर ले जाइए
गैलरी और म्यूज़ियम भी कभी ले जाइए।
पत्नी नाम...
कभी सिनेमा, कभी थिएटर ले जाइए
सभ्यता संस्कृति में अपनी रुचि बढ़ाइए।
पत्नी नाम...
कभी भूल कर भी उसका बर्थडे न भूलिए
फूल और चाकलेट ज़रूर घर लाइए।
पत्नी नाम...
ऐनीवर्सरी भूलने की कभी ज़ुर्रत न करिए
हित की बात तुमको यह बताता हूँ भइए।
पत्नी नाम...
कभी कभी उसे आश्चर्यान्वित करिए
अवसर न हो कोई तो भी साड़ी ज़ेवर ले आइए।
पत्नी नाम...
पत्नी से बड़ा कोई देवता न मानिए
प्यार से उसकी तुम पूजा नित करिए।
पत्नी नाम...
...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...१४ अक्टूबर २००७
At present, this blog is set up to publish my Hindi poems and accept comments from the readers. Some contributions from others are also published from time to time. Laxmi N. Gupta
Sunday, October 14, 2007
Tuesday, October 02, 2007
खुदा
ख़ुदी जब दूर होती है ख़ुदा तब पास आता है।
ख़ुदी जब पास होती है ख़ुदा तब दूर जाता है।
देखता है ख़ुदा को जो ख़ुद उसका गैरहाज़िर है।
जो हाज़िर है ख़ुदा उसके नहीं नज़दीक आता है।
बड़ा बेढब माज़रा यह बताते नहीं बनता है।
ख़ुदा को देखने वाला ख़ुदा वह ख़ुद ही होता है।
…लक्ष्मीनारायण गुप्त
…2 अक्टूबर 2007
ख़ुदी जब पास होती है ख़ुदा तब दूर जाता है।
देखता है ख़ुदा को जो ख़ुद उसका गैरहाज़िर है।
जो हाज़िर है ख़ुदा उसके नहीं नज़दीक आता है।
बड़ा बेढब माज़रा यह बताते नहीं बनता है।
ख़ुदा को देखने वाला ख़ुदा वह ख़ुद ही होता है।
…लक्ष्मीनारायण गुप्त
…2 अक्टूबर 2007
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