हम तो अपनी राह चलेंगे
सुबह नहीं तो शाम चलेंगे
कोई साथ नहीं भी आए
तो भी हम निर्भीक चलेंगे
हाथ काँपते, पैर फिसलते
तो भी हम अनवरत चलेंगे
हम तो...
जब तक यह जीवन है प्यारे
तब तक जग यह साथ हमारे
बुद्धदेव की बात मान कर
अपना दीपक स्वयं बनेंगे
नहीं किसी पर निर्भर होंगे
अपनी राह स्वयं खोजेंगे
हम तो...
जीवन गति का नाम
मृत्यु ही स्थिरता है
कठिनाई से रुक जाना ही
कायरता है
इसी सचाई के कायल हो
हम सदैव गतिमान रहेंगे
हम तो...
हर मुश्किल को झेलेंगे
कटिबद्ध रहेंगे
मित्र पथभ्रमित हो जाए तो
उसको लेकर साथ चलेंगे
अगर मित्र भी साथ न आए
तो हम अपने आप चलेंगे
हम तो...
...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...२६ सितम्बर २००७
At present, this blog is set up to publish my Hindi poems and accept comments from the readers. Some contributions from others are also published from time to time. Laxmi N. Gupta
Wednesday, September 26, 2007
Wednesday, September 05, 2007
साजन बिन
साजन बिन मोरा जिया घबरात
बिजुरी चमकै आधी रात
घनन घनन बदरा घघरात
सुनत सुनत मोरा जिया दहलात
सनन सनन सन पवन सुनात
हालैं हमरे कोमल गात
कोऊ अकेले मां पूछै न बात
बैरी बने बादर बिजुरी वात
बालम का परदेसवा सुहात
का करूँ सजनी बनै कइसे बात
साजन बिन मोरा जिया घबरात
…लक्ष्मीनारायण गुप्त
…5 सितम्बर 2007
बिजुरी चमकै आधी रात
घनन घनन बदरा घघरात
सुनत सुनत मोरा जिया दहलात
सनन सनन सन पवन सुनात
हालैं हमरे कोमल गात
कोऊ अकेले मां पूछै न बात
बैरी बने बादर बिजुरी वात
बालम का परदेसवा सुहात
का करूँ सजनी बनै कइसे बात
साजन बिन मोरा जिया घबरात
…लक्ष्मीनारायण गुप्त
…5 सितम्बर 2007
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