चिटठाकारी (२)
भाई समीर जी कहते हैं कि मैंने कड़ी तोड़ कर बड़ा अपराध किया है तो भाई माफ करना। कहते भी हैं:
छमिय चूक अनजानत केरी। चहिय मित्र उर दया घनेरी।।
तो प्रश्न तो वही हैं:
१। आपके लिये चिट्ठाकारी का क्या महत्व है?
२। चिट्ठाकारी ने आपके जीवन को कैसे प्रभावित किया है?
३। आप किन विषयों पर लिखना पसंद/नापसंद करते है?
४। आप किन चिट्ठाकारों से मिलना चाहते हैं?
५। आपकी बहुत अधिक मनपसंद दो पुस्तकें कौन हैं?
पाँच शिकारों के नाम हैं:
१। उन्मुक्त (unmukta-hindi.blogspot.com)
२। रवि रतलामी ( raviratlami.blogspot.com)
३। सुनील दीपक (kalpana.it/hindi/blog)
४। अतुल अरोड़ा (rojnamcha.blogspot.com)
५। अनूप भार्गव (anoopbhargava.blogspot.com)
माफ कीजियेगा कि इन कड़ियों को सजीव करने का तरीका मुझे नहीं आता है।
...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...२५ फरवरी २००७



