Sunday, October 14, 2007

पत्नी नाम

पत्नी नाम, पत्नी नाम, पत्नी नाम जपिए
जाही विधि राखे बीवी ताही विधि रहिए।

खिचड़ी खिलावे वो तो खिचड़ी से खुश रहिए
पकौड़ी खिलावे तो आप चटनी बनाइए।

पत्नी नाम....

सब्ज़ी वो बनावे तो प्याज़ आप काटिए
पति धर्म पालन में आँसू बहाइए।

पत्नी नाम....

खाना वो बनावे तो बर्तन आप धोइए
वोह थक जाए तो चरण भी दबाइए।

पत्नी नाम...

पत्नी को रिझाने हेतु काम सब करिए
तोंद बढ़ रही तो जिम नित जाइए।

पत्नी नाम...

पत्नी लात मोरे तो उसके तलवे सहलाइए
भृगु और विष्णु की कहानी याद करिए।

पत्नी नाम...

घर से निकाले तो लान में घास काटिए
दया दृष्टि होवे जब घर में फिर घुसिए।

पत्नी नाम...

छुट्टी जब होवे उसे बाहर ले जाइए
गैलरी और म्यूज़ियम भी कभी ले जाइए।

पत्नी नाम...

कभी सिनेमा, कभी थिएटर ले जाइए
सभ्यता संस्कृति में अपनी रुचि बढ़ाइए।

पत्नी नाम...

कभी भूल कर भी उसका बर्थडे न भूलिए
फूल और चाकलेट ज़रूर घर लाइए।

पत्नी नाम...

ऐनीवर्सरी भूलने की कभी ज़ुर्रत न करिए
हित की बात तुमको यह बताता हूँ भइए।

पत्नी नाम...

कभी कभी उसे आश्चर्यान्वित करिए
अवसर न हो कोई तो भी साड़ी ज़ेवर ले आइए।

पत्नी नाम...

पत्नी से बड़ा कोई देवता न मानिए
प्यार से उसकी तुम पूजा नित करिए।

पत्नी नाम...

...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...१४ अक्टूबर २००७

10 Comments:

At 12:50 AM, Anonymous संजय बेंगाणी said...

अथ श्री पत्नि पुराण कथा समाप्तम. जय हो जय हो जय जय हो.

सही लिखे हो. आँखे खल दी आपने.

 
At 12:50 AM, Anonymous संजय बेंगाणी said...

This post has been removed by a blog administrator.

 
At 1:12 AM, Blogger बोधिसत्व said...

यह पत्नी पुराण अच्छा है......

 
At 3:38 AM, Blogger मोहिन्दर कुमार said...

लक्ष्मी जी,

सुन्दर हास्य कविता है... परन्तु सत्य में भी पत्नी का नाम जाप करने में कोई बुराई नहीं...
दो दिन मायके चली जाये तो नानी दादी याद आ जाती है... बिना नार सब घर सूना.. मिली बांट होये दुख आधा और सुख दूना

 
At 5:18 AM, Blogger Mired Mirage said...

सही राह जा रहे हैं । यही राह मोक्ष दिलाती है ।
घुघूती बासूती

 
At 8:21 AM, Blogger Udan Tashtari said...

चलो, देर से सही. जीवन का गुढ़ रहस्य तो समझ आ गया. अब यह मंत्र श्रृंखला रोज उच्चारित कर कंठस्थ कर लिजिये.

:)

 
At 9:43 AM, Blogger Laxmi N. Gupta said...

संजय जी, मोहिंदर जी, बोधिसत्व जी, घुघूती जी एवं समीर जी,

बहुत बहुत धन्यवाद। अच्छा है कि अाप इस महान सत्य को समझ गए। अब तो अापकी चाँदी ही चाँदी है।

 
At 8:00 PM, Anonymous Anonymous said...

Good advice for "Shanti.. Shanti ..Shanti at home.
Ram

 
At 3:53 AM, Blogger Aditya said...

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At 4:31 PM, Blogger Laxmi N. Gupta said...

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