खुदा
ख़ुदी जब दूर होती है ख़ुदा तब पास आता है।
ख़ुदी जब पास होती है ख़ुदा तब दूर जाता है।
देखता है ख़ुदा को जो ख़ुद उसका गैरहाज़िर है।
जो हाज़िर है ख़ुदा उसके नहीं नज़दीक आता है।
बड़ा बेढब माज़रा यह बताते नहीं बनता है।
ख़ुदा को देखने वाला ख़ुदा वह ख़ुद ही होता है।
…लक्ष्मीनारायण गुप्त
…2 अक्टूबर 2007




3 Comments:
ख़ुदी जब दूर होती है ख़ुदा तब पास आता है।
ख़ुदी जब पास होती है ख़ुदा तब दूर जाता है।
--यह सही कहा...बेहतरीन.
आपका चिठा जगत मे स्वागत है !
आशा करते है आप निरंतर लिखते रहिएगा
समीर जी एवं दीपक जी,
धन्यवाद। दीपक जी, मैं तो 2005 से चिटठा लिख रहा हूँ। आज-कल जरा प्रविष्टियों के बीच का अन्तराल बढ़ गया है।
Post a Comment
<< Home