पड़वामोक्ष आख्यान
(यूट्यूब पर प्रकाशित निम्न विडियो पर आधारित:
http://www.youtube.com/watch?v=LU8DDYz68kM )
सुमिरन करि कै निरंकार का,
करि कै वाहे गुरू का ध्यान।
दक्खिन अफरीका की यारौ,
इक अद्भुत घटना करूँ बयान।।
क्रूगर पार्क माँ जो तुम जाओ,
बहुत जानवर पड़ैं दिखाय।
बड़े बड़े भैंसा, बड़े बड़े केहरि,
सबै तरह के मृग दिखलायँ।।
छोटा झुंड रहै बैंसन का,
नदी किनारे चलै पगुराय।।
पाँच, छै सिंह जो बड़े भयंकर,
उन भैंसन का दियो दौड़ाय।
छोटी उमर का इक पड़वा था,
दौड़न माँ पीछे रहि जाय।।
उसे दबोचा फिर शेरन ने,
उसकी जान बचन की नाँय।
पड़वा निकरो यह अवतारी,
आरत बाणी से चिल्लाय।
पुरब काल माँ हे, प्रभु तुमने,
इक हाथी को लियो बचाय।
जैसे गज का ग्राह ते बचायो,
मोहिं सिंहन ते लेहु बचाय।।
आनन फानन तबहीं हरि ने,
एक ग्राह को दयो पठाय।।
एक तरफ ते शेर खींचि रहे,
दुसरी टाँग मगर मुँह माँय।।
पड़वा सोचै या कैसी भै,
दोहरी मुसीबत परै दिखाय।।
प्रभु बोले तुम फिकिर करौ ना,
तुम्हरी जान बचैगी भाय।।
प्रभु की बात मानि पड़वा ने,
बदन शिथिल करि दीन्हो भाय।।
बाजी जीति लई शेरन ने,
पड़वा पड़ा नदी तट भाय।।
लेकिन मित्रौ यही समय अब,
भारी चमत्कार होइ जाय।
जहँ तक देखौ तहँ तक मित्रौ,
भैंसे भैंसा परैं दिखाय।।
मोर्चा तानि दिया भैंसन ने,
शेरौ तुमको मज़ा चखायँ।।
एक ते एक भयानक भैसा,
पैने सींगन वाले भाय।।
लगा मोर्चा है भैंसन का,
शेरन का अब दिल दहलाय।।
इक भैंसे ने एक शेर को,
जंगल तरफ दियो दौड़ाय।
दुसरे सिंह को पकरि सींग ते,
फेंको बहुत दूर तक भाय।।
यह गति देखी जब सिंहन ने,
इक दुइ आपहिं गए पराय।
बाकी शेरन का भैंसन ने,
मारि पीटि कै दियो भगाय।।
करामात अब प्रभु की देखौ,
पड़वा तुरत खड़ो होइ जाय।
चोट जरा ना उसके लागी,
जाको प्रभु ने लियो बचाय।।
देहीं चाटैं माईबाप अब,
पड़वा अब गदगद होइ जाय।
अपने बंधु बांधवन के संग,
पड़वा चला गर्व ते जाय।।
पड़वामोक्ष की सुन्दर गाथा,
अब हम सबको दियो सुनाय।
सुनै प्रेम से जो कोइ इसको,
संकट ते मुक्ती होइ जाय।।
...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...१७ अगस्त २००७




6 Comments:
पड़वामोक्ष आख्यान को, सुना लगा कर ध्यान.
वाह गुप्ता जी की लेखनी, धन्य है उसकी शान.
--बहुत बढ़िया, लक्ष्मी जी. बधाई.
पड़वामोक्ष की सुन्दर गाथा,
अब हम सबको दियो सुनाय।
सुनै प्रेम से जो कोइ इसको,
संकट ते मुक्ती होइ जाय।।"
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तथास्तु !!
स स्नेह,
- लावण्या
बहुत अच्छा। क्या कविता बनाई है।
park byakhyan ka, accha jatan diyo batlay.
bhais-sher ke muh me, padva peecche diyo bhgay.
bahut acchi kavit..........likhte rahiye.
park byakhayan ka, accha jatan dio batlay.
bhais sher ke muh me, padhva picche diyo dauday.
bahut acchi kavita likhte rahiye....
समीर जी, लावण्या जी,सुधीर जी, ताराचन्द्र जी और
अज्ञात (anonymous) जी,
आपकी सदाशयता का आभार प्रकट करता हूँ। धन्यवाद।
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