Monday, July 09, 2007

विश्व हिन्दी सम्मेलन

सुना है हो रहा है विश्व हिन्दी सम्मेलन।
हो रहा है एक वृहत् आयोजन।।
बड़े बड़े नेता और बड़े बड़े विद्वान।
पधारेंगे अपनी बढ़ायेंगे शान।।
भाषण होंगे, होंगे कविसम्मेलन।
होगा साहित्य और राजनीति का मिलन।।
भाषणों की किन्तु होगी बहुतायत।
जबान सस्ती है नहीं इसकी कोई कीमत।।
सरकारी लोग भी भाषण देंगे।
सम्भवतः वे अंग्रेज़ी में बोलेंगे।।
सुना है कुछ लोग यह भी कहेंगे।
हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र में मान्यता दिलायेंगे।।
सरकारी लोग भी इसका समर्थन करेंगे।
और भाषणों के बाद तालियाँ बजायेंगे।।
मैं सोचता हूँ हिन्दी संयुक्त राष्ट्र की भाषा बन सकती है।
वैसे ही जैसे यह भारत की राज्य भाषा बन पड़ी है।।
केवल एक प्रस्ताव पास करा दो।
हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की एक भाषा बना दो।।
केवल उसमें एक शर्त लगा दो।
मित्रो, एक पन्थ दो काज बना लो।।
हिन्दी संयुक्त राष्ट्र की एक भाषा बन जायेगी।
जिस दिन हिन्दी यथार्थ में भारत की राज्यभाषा बन जायेगी।।

...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...९ जुलाई २००७

6 Comments:

At 1:02 AM, Blogger सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव said...

अच्छे भाव हैं। हकीकत बयां की है आपने

 
At 1:07 AM, Blogger अरुण said...

काहे देख रहे हो सपना,
बजाने का थाली
गर हो जाता जुगाड
हमारा भी जाने का
तुम देखते टी वी पर
हम भी वहा
बजा रहे होते ताली

 
At 1:29 AM, Blogger संजय बेंगाणी said...

सही फरमाया आपने

 
At 2:58 AM, Blogger Neelima said...

बहुत सही कहा आपने ! शत- प्रतिशत सहमति

 
At 2:36 PM, Blogger अनूप शुक्ला said...

सत्यवचन!

 
At 6:46 PM, Blogger Laxmi N. Gupta said...

सत्येन्द्र जी, अरुण जी, संजय जी,नीलिमा जी और अनूप जी,

प्रोत्साहन के लिये धन्यवाद।

 

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