Tuesday, May 15, 2007

हरि अनंत हरि कथा अनंता

पाला रिचमन (Paula Richman) की एक पुस्तक हैः "Many Ramayanas" । मैं इस पुस्तक की प्रस्तावना पढ़ रहा था जिसमें उन्होंने रामकथा से सम्बंधित एक तमिल लोककथा का जिक्र किया है। यह कथा उन्हें स्व० ए० के० रामानुजन ने सुनाई थी। मुझे लगा कि यह मेरे पाठकों को अच्छी लगेगी।

एक बार रामचंद्र जी अपनी सभा में बैठे थे कि अचानक उनकी मुद्रिका गिर कर फर्श के एक छोटे से छेद में गिर गई। हनुमान जी को भेजा गया कि पता लगाएँ कि यह छेद कहाँ जाता है और अँगूठी को वापस लाएँ। यह छेद बहुत गहरा निकला। पता लगाते लगाते हनुमान जी पाताल में नागलोक तक पहुँचे। जब उन्हें नागराज के दरबार में पेश किया गया और उन्होंने रामचन्द्र जी की अँगूठी के बारे में पूछा। नागराज ने उन्हें एक बहुत बड़े कक्ष में भेजा। उस कक्ष में हजारों अँगूठियाँ थीं, वैसी ही जैसी रामचन्द्र जी की खोई थी। ऊनसे कहा गया कि इनमें से जो आप की हो वह निकाल लें। हनुमान जी बिचारे बहुत परेशान कि सही अँगूठी की पहचान कैसे करें। फिर नागराज के पास आये। नागराज ने उनसे कुछ प्रश्न किए फिर बताया कि अब सही अँगूठी के पता लगाने का कोई लाभ नहीं है क्योंकि जब तक हनुमान जी अँगूठी लेकर अयोध्या पहुँचेंगे, रामावतार का अन्त हो चुका होगा। ऊन्हें बताया गया कि जब जब रामावतार का अन्त होने वाला होता है, इसी प्रकार से अँगूठी गिरती है, नागलोक पहुँचती है और हनुमान जी को पता लगाने के लिए भेजा जाता है!

कैसी लगी आपको यह कहानी?

...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...१५ मई २००७

12 comments:

Udan Tashtari said...

कथा तो अच्छी लगी. वैसे हनुमान जी कब तक लौटेंगे अबकी?? उस विषय में कुछ लिखा है क्या? इंतजार लगा है.

अभय तिवारी said...

चलिये माना.. मगर वो बाकी हज़ारों अंगूठियाँ किसकी थीं.. ?

Laxmi N. Gupta said...

समीर जी,

धन्यवाद। हनुमान जी अगले रामावतार पर फिर हाजिर होंगे।

Laxmi N. Gupta said...

तिवारी जी,

टिप्पणी के लिये धन्यवाद। वे हजारों अँगूठियाँ पहले हुए हजारों रामों की थीं!

sunita (shanoo) said...

बहुत अच्छी कथा लगी,..पसंद आई धन्यवाद!
सुनीता(शानू)

संजय बेंगाणी said...

प्रतिकात्मक कथा अच्छी है. जो पुनरावर्तन को दर्शाती है.

आलोक पुराणिक said...

हनुमानजी को लौटा लाइए। अंगूठी भले ही वापस न आये। हनुमानजी के बगैर काम चलना मुश्किल है। बजरंग दल वालों से आपकी शिकायत कर दूंगा, तो आप पर हमला हो जायेगा। उनके हनुमानजी को आप यूं पाताल लोक में भेज देंगे, और वो चुप रहेंगा।

परमजीत बाली said...

जहाँ तक मुझे कथा का भाव समझ मे आया है वह शायद यह कहना चाहते है कि मृत्यु निश्चित है। उसे कोई टाल नही सकता।या जो समीर जी ने लिखा वह बात हो।

प्रियंकर said...

राम की शास्त्रीय कथाओं के बरक्स भारत के विभिन्न इलाकों के लोकमानस कई ऐसी लोककथाएं प्रचलित हैं जिनमें राम कथा कुछ अलग ही रूपाकारों में मिलती है .

'ग्रेट ट्रैडीशन' के साथ हमेशा एक 'लिटिल ट्रैडीशन' भी चलती है जो तमाम क्षेत्रीय भिन्नताओं के बावजूद कथा का एक वैकल्पिक पाठ हमारे सामने रखती है . शायद ज्यादा लोकोन्मुख पाठ . अतः उसे भी समझने की ज़रूरत है . इसमें कई नृजातीय या एन्थ्रोपोलॉजी के सूत्र भी काम करते हैं.

ए.के. रामानुजन ने ऐसी कई कथाओं का दस्तावेजीकरण किया है . इस महादेश के मन-माथे को समझने-समझाने के लिए इसकी बहुत ज़रूरत भी है .

Laxmi N. Gupta said...

सुनीता जी, संजय जी, आलोक जी, परमजीत जी और प्रियंकर जी,

आप सभी की टिप्पणियों का धन्यवाद। जैसा कि संजय जी ने लिखा, यह कथा पुनरावर्तन और समयचक्र के बारे में है।

guttu said...

are yaaron... hindi kaise likhte hain isme???
rahi comment ki baat.. katha achhi lagi :-)

Laxmi N. Gupta said...

गुटटू जी,

टिप्पणी के लिये धन्यवाद। हिन्दी लिखने के लिये यह देखिये:

http://ashishkachittha.blogspot.com/2004/11/information-on-enabling-reading-and.html