कन्हैया ने पहिनी जीन्स
(पिछले हफ्ते सुनने में आया कि वृन्दावन के एक मन्दिर में पुजारी ने कृष्ण भगवान की मूर्ति को जीन्स और टीशर्ट पहना दिया और हाथ में मुरली की जगह मोबाइल फोन लगा दिया। बड़े हंगामे हुए और पुजारी बर्ख़ास्त किया जाने वाला था। मैंने सोचना शुरू किया यदि कृष्ण भगवान कलियुग में पैदा हुए होते तो क्या होता। यह कविता इस चिंतन का फल है।)
कन्हैया ने पहिनी जीन्स बड़ा रसु आयो रे।
टी बनियाइन पहिन प्रभू जी रास रचायो रे।।
गोपिन ने पहिनी जीन्स बड़ा रसु आयो रे।
हाल्टर टाप पहिन गोपिन ने रास रचायो रे।।
कन्हैया ने...
या कलजुग माँ मोहन का माखन ना भायो रे।
पीज़ा हट में पीज़ा खावैं गोपिन का खिलायो रे।।
गोरस पीवन माँ रस नाहीं कोक पिलायो रे।
पान प्रभू अब खावत नाहीं चुविंग गम चबायो रे।।
कन्हैया ने...
नन्दगाँव से बरसाने का मोबाइल मिलायो रे।
मोबाइल के ऊपर प्रभू जी मुरली बजायो रे।।
मुरली सुनि कै राधा रीझीं प्रभु को बुलायो रे।
तुरत चल्यो प्रभु नन्दगाँव से बरसाने पहुँच्यो रे।।
मोटरसइकल माँ प्रभु अपनी राधा को बिठायो रे।
वा छवि का हम कैसे बरनैं कछु कहत न जायो रे।।
कन्हैया ने...
...लक्ष्मीनारायण गुप्त
...२८ सितम्बर २००६



