ब्लागिंग
१। ब्लागिंग के गुण बहुत हैं, ब्लागिंग सुख की खान।
देश देश के मित्र गण, होवत बन्धु समान।।
ब्लागिंग के अवगुण बहुत, ब्लागिंग दुःख की खान।
देश देश के दुष्ट गण, झुलसावत हैं प्रान।।
२। ब्लागिंग के सुख बहुत हैं, सुनौ जोरि कै कान।
सुन्दर सुन्दर कमेन्ट पढ़ि, फूलत नाहिं समान।।
ब्लागिंग के दुःख बहुत हैं, सुनौ जोरि कै कान।
क्या कमेन्ट बिन मिले ही, निकरि जायँगे प्रान।।
३। निंदा वाली कमेन्ट यदि, डारि गयो है कोय।
तौ डिलीट करि देव यहिं, मन माँ क्षोभ न होय।।
४। ('ग़म का फसाना किसको सुनायें' की तर्ज पर)
ब्लागिंग के दुःख किसको सुनायें।
टूटा हुआ दिल किसको दिखायें।। (blatantly plagiarized)
तेरा भला हो ओ पढ़ने वाले, खोटी खरी तू मुझको सुनाये।
क्या आयेगा कभी दिल वाला, जिसको हमारा ब्लाग सुहाए।।
..... लक्ष्मीनारायण गुप्त
...... जनवरी २००६



