Wednesday, January 04, 2006

वसुधैवकुटुम्बकम्

सन्त: नहीं कोई मेरा इस दुनिया में दुश्मन।

इसलिये मेरे लिये वसुधैवकुटुम्बकम्।।


असन्त: मार दूँ सबको मेरे जो दुश्मन।

तो मेरे लिये भी वसुधैवकुटुम्बकम्।।



ब्राह्मण: वैसे तो मेरे लिये वसुधैवकुटुम्बकम्।

बिटिया की शादी के लिये ब्राह्मणेवकुटुम्बकम्।।

(ब्राह्मण की जगह अपनी मनोवांछित जाति या समूह प्रतिस्थापित (substitute) करें.)



नेता: थ्योरी में मेरे लिये वसुधैवकुटुम्बकम्।

प्रैक्टिस में मेरा वोट बैंक ही मेरा कुटुम्बकम्।।



दलित नेता: खाक कहते हो वसुधैवकुटुम्बकम्।

मनुवादियों के जीते जी कैसे वसुधैवकुटुम्बकम्।।



कट्टर मुसलमान: बकवास है वसुधैवकुटुम्बकम्।

काफ़िरों के रहते कैसे वसुधैवकुटुम्बकम्।।



कट्टर हिन्दू: आदर्श की बात है वसुधैवकुटुम्बकम्।

जब तक मुसलमान हैं, कैसे होगा वसुधैवकुटुम्बकम्।।



ईरानी अयातुल्ला: अमरीकी शैतान जब तक है मौजूद।

वसुधैवकुटुम्बकम् हरग़िज़ नहीं मंज़ूर।।



कट्टर ईसाई: ग़लत है कहना वसुधैवकुटुम्बकम्।

ईसा को मानने वाले ही मेरा कुटुम्बकम्।।



एन आर आई: अपनी परम्परा का ध्यान रखते हैं।

चाट खाते हैं, चाय पीते हैं।।

मन्दिरों को चन्दा देकर,

बालकों के नाम के प्लैक लगवाते हैं।

बिटिया यदि करती विधर्मी से विवाह

तिरस्कार करके कहते हैः

भाड़ में जाये वसुधैवकुटुम्बकम्।।



फ्रान्सीसी उद्योगपति: एसबेस्टस के जहाज को तोड़ेंगे भारत में

क्योंकि मानते हैं हम वसुधैवकुटुम्बकम्।



मध्यवर्गी भारतीय: छोड़ के अपनी संस्कृति को

पश्चिम का करते हैं अन्धानुकरण।

क्योंकि ऐसा कहते हैं दिलोजान से हम

कि इसी में है वसुधैवकुटुम्बकम्।।



...लक्ष्मीनारायण गुप्त

...४ जनवरी २००६

4 comments:

Mayur Shah said...

Guptaji

aapko itni sunder sunder kavitayein likhne ke liye bahut bahut badhaiyan... aise hi likhte rahiye aur ho sake to inhe chhapvane ki koshish bhi kariye!!! aur agar chhap jaaye to sabse pehli 'prati' mujhe dijiyega!!!

jai hind
Mayur Shah
Vadodara, Gujarat. Hindustaan

रेलगाड़ी said...

गुप्त जी, तुकान्त कविताओं में अपने विचार व्यक्त करने की आप दक्ष हैं। मैं भी तुकांत कविताओं का शौक़ीन हूं। भारत में कहाँ से हैं आप?

Laxmi N. Gupta said...

mayoor jii aur anaam jii,

dhanyawaad. mujhe khushii huyii ki aapko merii kavtaye.N pasand ayii.N. mai.N bhaarat me.N kanpur se huu.N.

laxminarayan

Anurag Agarwal said...

Aapney apnee is kavita ke maadhyam se sabhee vargon aur dharmon ke logon ki "vasudhaivkutumbkam" ki chavi ka jo chitran kiyaa wo bahut hi sahraaniye aur sateek hai. Bahut achee kavita hai.