मधु है, मधु मास है मधुपान की इच्छा बड़ी है
पी नहीं सकता मगर मधुमेह की शंका बड़ी है
मद है, मदिरा है, मुझे मस्ती बड़ी है
पीने की मुमानियत कर दी है पत्नी ने
मर जाओगे जिगर की सिरोसिस से
क्यों तुम्हें मुझे विधवा बनाने की इच्छा बड़ी है
मुर्ग है, मसाले हैं, बासमती चावल भी उम्दा है
बिरियानी खाने की तबियत बड़ी है
खा नहीं सकता मगर मैं दोस्तो
क्योंकि रक्त में शर्करा बढ़ी है
अंडे हैं, हरा धनिया है, हरी मिर्च की शोभा बड़ी है
खा नहीं सकता मगर मैं आॅमलेट
कोलेस्टराॅल बढ़ जाने की शंका बड़ी है
अर्थराइटिस का दर्द भारी है
पेनकिलर लेने की ज़रूरत बड़ी है
लेने से लेकिन दिल के दौरे की सम्भावना बड़ी है
जिम जाता हूँ, कोल्हू के बैल की तरह
ट्रैक पर दौड़ता हूँ ऐरोबिक कसरत के लिए
क्या करूँ, मन मरने का अभी करता नहीं है
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---३० अप्रैल २०१३